Mani Ayurveda

आधुनिक चिकित्सा

आयुर्वेद का इतिहास 5,000 वर्ष से भी पुराना है और इसकी उत्पत्ति भारत में हुई थी।
मुख्य ऐतिहासिक चरण:
* वैदिक काल: आयुर्वेद की जड़ें ऋग्वेद और अथर्ववेद में मिलती हैं। इसे अथर्ववेद का 'उपवेद' माना जाता है।
* पौराणिक उत्पत्ति: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने आयुर्वेद का ज्ञान भगवान धन्वंतरि को दिया, जिन्हें आयुर्वेद का देवता माना जाता है।
* संहिता काल (स्वर्ण युग): ईसा पूर्व 6वीं शताब्दी से 7वीं शताब्दी के बीच आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथ लिखे गए:
* चरक संहिता: महर्षि चरक द्वारा रचित, जिसे काय-चिकित्सा (Medicine) का आधार माना जाता है।
* सुश्रुत संहिता: महर्षि सुश्रुत द्वारा रचित, जिसमें शल्य चिकित्सा (Surgery) का विस्तृत वर्णन है।
* विदेशी प्रसार: 8वीं शताब्दी में इन ग्रंथों का अरबी में अनुवाद हुआ, जिससे यह ज्ञान मध्य पूर्व और यूरोप तक पहुँचा।

OUR STORY

आयुर्वेद केवल जड़ी-बूटियों का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का एक संपूर्ण विज्ञान है। इसे मुख्य रूप से ‘अष्टांग आयुर्वेद’ कहा जाता है क्योंकि इसमें चिकित्सा की 8 महत्वपूर्ण शाखाएं होती हैं।

यहाँ उन 8 शाखाओं और आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांतों का विवरण दिया गया है:

1. अष्टांग आयुर्वेद (8 शाखाएं)

| शाखा का नाम | आधुनिक चिकित्सा में अर्थ | विवरण | |—|—|—|

| काय चिकित्सा | Internal Medicine | बुखार, खांसी और पाचन जैसे सामान्य रोगों का उपचार। |
| शालक्य तंत्र | ENT & Ophthalmology | आँख, कान, नाक, गले और सिर के रोगों का इलाज। |
| शल्य तंत्र | Surgery | महर्षि सुश्रुत द्वारा विकसित शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) की तकनीकें। |
| अगद तंत्र | Toxicology | विष, जहर और सांप-बिच्छू के काटने का उपचार। |
| भूत विद्या | Psychiatry | मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक रोगों का उपचार। |
| कौमारभृत्य | Pediatrics | शिशुओं और बच्चों के रोगों तथा प्रसव से संबंधित ज्ञान। |
| रसायन तंत्र | Rejuvenation | उम्र को रोकने (Anti-aging) और लंबी आयु प्राप्त करने की विधि। |
| वाजीकरण तंत्र | Reproductive Health | प्रजनन शक्ति और संतान प्राप्ति से संबंधित चिकित्सा। |

2. आयुर्वेद के मुख्य स्तंभ: त्रिदोष

आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर तीन ऊर्जाओं (दोषों) से बना है। जब ये संतुलित होते हैं तो हम स्वस्थ रहते हैं, और असंतुलन होने पर बीमारी होती है:

* वात (Vata): आकाश और वायु तत्व। यह शरीर में गति (Movement) को नियंत्रित करता है।
* पित्त (Pitta): अग्नि और जल तत्व। यह पाचन और चयापचय (Metabolism) को नियंत्रित करता है।
* कफ (Kapha): पृथ्वी और जल तत्व। यह शरीर की संरचना और मजबूती को बनाए रखता है।

3. मुख्य चिकित्सा पद्धतियां

आयुर्वेद में इलाज केवल दवा से नहीं, बल्कि शरीर की शुद्धि से किया जाता है:

* पंचकर्म: यह शरीर से विषैले तत्वों (Toxins) को बाहर निकालने की पांच प्रक्रियाओं का समूह है।
* आहार-विहार: सही भोजन और सही जीवनशैली को दवा से भी अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।
* जड़ी-बूटियाँ: गिलोय, अश्वगंधा, नीम और तुलसी जैसी प्राकृतिक औषधियों का उपयोग।